छात्र और राजनीति (Student and politics)
आधुनिक काल में राजनीतिक का अर्थ कहीँ अधिक व्यापक हो गया है । आज राजनीति शब्द राज्य के सत्ता संबंधी समस्त गतिविधियों का परिचायक हो गया है। सरकार निर्माण से लेकर सरकार के दिभिन्न अगो द्वारा किए जाने वाले समस्त कार्य राजनीति के अतर्गत आते हैं। स्पष्ट है कि राजनीति आधूनिक जीवन की एक अनिवार्यता बन गईं |
क्या विद्यार्थियो को भी इस में भाग लेना चाहिए? यह आज का एक ज्वलंत प्रश्न है । विगत कुछ वर्षों में विद्यार्थियो ने राजनीति में सक्रिय भाग लिया है, जो युगीन जागरूकता का परिचायक है। विद्यार्थियो का पढाई त्यागकर हडताल, पथराव ,आगजनी और नारेबाजी में संलग्न होना यह उस प्रश्न को अत्यंत महत्वपूर्ण बना देता है कि विद्यार्थी को राजनीति में भाग लेना चाहिए अथवा नहीं?
कुछ लोग विद्यार्थियो के राजनीति में भाग लेने के विरोधी है। उनके अनुसार राजनीति धूर्तता की क्रीडा भूमि है । विद्यार्थियों को इस दूषित वायु से टूर रखने का
यथासंभव प्रयास किया जाना चाहिए। कुछ लोगों का बिचार है कि विद्यार्थियों को राजनीति में माग लेना चाहिए ताकि विद्यार्थी जीवन में ही इस क्षेत्र में निपुणता प्राप्त
करके एक आदर्श नागरिक के रूप में अपने राजनीतिक कर्तव्यों का निर्वाह कर सके। एक तीसरे बिचार के अनुसार विद्यार्थियों को राजनीतिक सिद्धांतों का अध्ययन तो करना चाहिए किंतु उन्हें व्यावहारिक राजनीतिक में भाग लेने की अनुमति नहीं प्रदान की जानी चाहीए ।
निष्कर्षत्त८ विद्यार्थियों द्वारा राजनीति मे माग लेना न केवल भविष्य के लिए उपयोगी है, बल्कि वर्तमान के लिए भी उपयोगी सिद्ध हो सकता है। यह बर्तमान समय की माँग भी है ।