Monday, 7 January 2019

महंगाई (Inflation)

महंगाई (Inflation)
Monday, 7 January 2019

महंगाई (Inflation)

कमरतोड़ महँगाई का सवाल आज कै मानव की अनेकानेक समस्याओं में अहम् बन गया हैं पिछले कई सालों रो उपभोक्ता-वस्तुओं की कीमतें आसमान छू रही है।
हमारा भारत एक विकासशील देश है और इस प्रकार की अर्थव्यवस्था वाले देशो० में औद्योगीकरण या बिथिन्न योजनाओं आदि कै चलते पुंद्रा-स्फीति तो होती ही है, किन्तु आज वस्तुओं कौ मूल्य सीमा में निरन्तर वृद्धि और ज़न-जीवन अस्त-व्यस्त ढोता दीख रहा हैँ अब तो सरकार मी जनता का विस्वास खोती जा रही है। लोग यह कहते पाए जाते हैं कि सरकार का शासन-तंत्र प्रष्ट ही चुका है, जिसर्क कारण जनता बेईमानी, नौकरशाही और मुनाफाखोरी की चक्सियों तले पिस रही हैं ।
यह मंहगाई स्वतंन्ता-प्राप्ति र्क बाद लगातार बही है। यह भी सत्य है कि हमारी राष्ट्रगैय आय बही है ओर लोगों को आवश्यकताएँ मी बही है।
हमारी सरकार द्वारा निधार्ररित कौटा-परमिट की पद्धति ने दलालों कै नये वर्म को जन्म दिया है और इसी परिपाटी ने विक्रता तथा उपभोक्ता में संचय कौ प्रवृति उत्पन कर दो है। प्रशासन कै अधित्कारो दुकानदारों को कालाबाजारी करने देने र्क बदले घुस और उद्योगपतियों को अनियमितता को छूट देने हेतु राजनीतिक घाटियां घूस तथा चन्दा वसूलती हैं।
महँगाई ने बिमिन्न वर्गों र्क कम्रचारियों को हड़ताल-आन्दोलन करने कै लिए भी बढावा दिया है जिससे काम नहीँ करने पर मी कर्मचारियों को वेतन देना पड़ता है। जिससे उत्पादन में गिरावट और तेयार माल की लागत मैं बहोत्तरी होती है।
महँगाई की समस्या का अन्त सम्भव हो तो कैसे, यह विचारणीय विषय हैं सरकार वस्तुओं की र्कामतों पर अंकुश लगाए, भ्रष्ट व्यक्तियों हेतु दण्ड-व्यवस्था को कठोर बनाए एवं व्यापारी-वग का कीमतें नहीं बढाने को चाधूय करे। तात्पर्य यह है कि इस कमरतोड़ महँगाई कै पिशाच को जनता, पूँजीपति ओर सरकार कै सम्मिलित प्रयास सै ही नियंत्रण से हौ नियंत्रण में किया जा सकता हैं