Thursday, 17 January 2019

भारतीय किसान Indian farmer

भारतीय किसान Indian farmer
Thursday, 17 January 2019

भारतीय किसान Indian farmer

भारतीय किसान स्वभाव से निरछल तथा सीधे साधे होते हैं। ईमानदारी इनकी जीवन का अलंकार है। ये ईश्वर पर अटूट बिश्वास और श्रद्धा रखते हैँ 1 इनका मानना है कि ईश्वर जिस बिधि से रखे उस विधि से रहना चाहिए । इसके साथ ये यह भी मानते हैँ कि घोर से घोर विपत्ति में भी हिम्मत नहीं हारनी चाहिए तथा भगवान का नाम नहीं भूलना चाहिए। कर्म के साथ अध्यात्म का अपूर्व सहयोग ही भारतीय कृषक का अस्तित्व निर्मित करता है। खेती इनका यज्ञ है, खेत की धरती इनका यज्ञ मंडप है। परिश्रम इनके जीवन का सबसे बडा धर्मं है । 

भारतीय किसानों की आर्थिक स्थिति संतोषजनक नहीँ है। यह कितने दुख की बात है कि सारे देश को खिलाने वाला किसान अपने बिना खाए सो जाए। सरों के शरीर ढके और अपने नंगा रहे। यह सुबह से शाम तक कडी मेहनत करते '। सुबह उठे कुंट्टी काटी, नाद साफ की, गाय बेलों को दाना पानी दिया, गाय भैंस दोहा, फिर कुछ रुखा सुखा खाकर हल बैल लिए और खेतों की और चल पडे। दोपहर तक हल चलाते रहे।

खेत में ही खाना पहुंच गया, तो बही किसी वृक्ष की छाया में बैठ कर खा तिया, नहीं तो कथे पर हर रख बेलों के पीछे पीछे घर की और चल पडे। बेलों को नोंद पर बांधकर, पानी पिलाया और अपने खाकर वालों को खिलाने के लिए चारा काटने लगे। सुबह से शाम तक इनका जीवन कठिन परिश्रम और कठोर साधना में बीतता है।

इतनी परेशानी इतनी उलझन, इतनी मेहनत के बाद भी यह जो कुछ उत्पादन करते हैं ,उससे इनके परिवार की आवश्यकता यूरी नहीं हो पाती। पारिवारिक चिंता में व्यग्र ये धीरे धीरे कृशकाय हो जाते हैं। यही भारतीय कृषक की नियति है। 

अधिकतर भारतीय किसान अनपढ होते हैँ। इनकी गरीबी का मुख्य कारण अशिक्षा भी है। यह बहुत सारी गलत रूढियों के शिकार हैँ। जिम्हें शिक्षा से ही दूर किया जा सकता है । इनके शिक्षा का समुचित प्रबंध कर तथा वेज्ञानिंक ढंग से खेती करने की सारी सुविधाए देकर, उनकी आर्थिक दशा में समुचित सुधार लाया जा सकता हे ।

भारतीय किसान त्रठण में ही ज़न्म लेता है, त्रटण में ही पलता है, और ऋण में ही मर जाता हे। इस भ्रामक लोकोक्ति को मिटाया जा सकता है। किसानों की खुशहाली ही देश की खुशहाली है, क्योकि भारत किसानों का देश है 80०/० देश की आबादी कृषि पर ही निर्भर है ।