Thursday, 17 January 2019

Father of the Nation Mahatma Gandhi (राष्ट्रपिता महात्मा गांधी)

Father of the Nation Mahatma Gandhi (राष्ट्रपिता महात्मा गांधी)
Thursday, 17 January 2019

Father of the Nation Mahatma Gandhi (राष्ट्रपिता महात्मा गांधी)

दुबली पतली काया , खद्दर की लंगोटी में लिपटा हुआ वह सेवाग्राम का संत संपूर्ण भारत की दिव्य आत्मा था। वह भारत का ज्योतिषमान भव्य भाल था। वह इस निर्धन, पीडित शोषित देश की जनता का हृदय सम्राट था। छोटी छोटी चमकती आँखें, चेहरे पर खेलती हुई शुद्ध, निर्मल मुस्कान, न जाने कितने शोषित एवं प्रेरित भारतीयो को सांत्वना दे चुकी हैं । न जाने उसमें कैसा जादू था, केसी अदभुत शक्ति थी कि कितने वर्षों से निराश भारतीयो में जीबन, आत्मविश्वास, प्रेम, सद्भाव और कर्तव्यनिष्ठा को कुछ ही वर्षो में जाग्रत कर दिया । 

2 अक्टूबर, 1869 ईसवी का वह पावन दिवस था जब गुजरात के पोरबंदर (काठिथाबाड़) की धरती पर इस महान आत्मा का अवतरण हुआ था। इनके पिता करमचंद गांधी वहां के दीवान ये। इनकी माता पुतलीबाई एक धर्मनिष्ठ महिला थीं। गांधी जी एक साधारण विद्यार्थी ये, पर शुरू से ही सत्य के प्रति उनकी अटूट निष्ठा थी। पिता की मृत्यु के बाद बैरिस्टर पढने इंग्लैड गए ।

 बैरिस्टर बनकर इंग्लैंड से लौटने के बाद एक मुकदमे के सिलसिले में उन्हें दक्षिण अफ्रीका जाना पड़।। वहां भारतीयों की दुर्दशा देखकर उन्हें बडी वेदना हूई। उन्हें मानवोचित अधिकार दिलाने के लिए उन्होनै वहां अहिंसक आंदोलन छेडा जिसक आगे वहां के गोरे शासको को झुकना पडा। 

दक्षिण अफ्रीका से लौटने के बाद सदस्यों की दशा सुधारने एवं अग्रेजों के शोषण का अत करने में वे लग गए। यहॉ उनके सत्याग्रह आंदोलन का प्रथम कार्यक्षेत्र बना चंपारण, जहाँ निलहे गोरों का अत्याचार अपनी पराकाष्ठा पर था। और, इसके बाद तो देश का हर गाँव, हर नगर उनका कार्यक्षेत्र बन गया। 

सत्य और अहिंसा उनके अस्त्र ये। काग्रेस का नेतृत्व उनके हाथों में आ गया । आजादी के लिए उन्होंनै सत्याग्रह और सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरु किये और, उसके आगे अग्रेज टिक न सके। अतत: 15 अगस्त, 1947 ईस्वी को हमारा देश स्वतंत्र हुआ । 

महात्मा गांधी जीवनभर आध्यात्मिक मूल्यों के पक्षधर रहे। सरि राष्ट्र ने उन्हें राष्ट्रपिता का सम्मान दिया और वह ’बापू' कहलाए। वस्तुत: महात्मा गाँधी की देन आज भी प्रासंगिकतापूर्ण है